Dirty Picture

अब तो बस कीजिये

बहुत दुःख होता है देख कर मुझे अपने क्षेत्र की इस कुप्रथा को देख कर. आपके इस कालम के माध्यम से मैं सभी बुंदेलखंड के निवासियों से ये प्रार्थना करना चाहूंगी कि अब तो कम से कम बस करो भाई. बरसों से चली आ रही है ये कुप्रथा. कब आज़ाद होंगे हम इससे? कब तक हमारी दलित महिलाएं हाथ में चप्पल लेकर चलेंगी यहां पर? क्या उन्हें मानव होने का अधिकार नहीं? क्या उन्हें मानवीय सम्मान का हक़ नहीं? जी हाँ, जिनको जानकारी नहीं है उनके लिये बताना चाहूँगी कि यहां हमारे बुंदेलखंड में दलित महिलाएं घर के बड़े-बुजुर्गों और ऊंची जातियों के लोगों को देखकर चप्पल सर और हाथ में ले लेती हैं. ये महिलायें बरसों से इस परम्परा को ढो रही हैं.  वे चप्पल पहनकर घर के बुजुर्गों और ऊंची जाति के लोगों के सामने नहीं जा सकतीं. चाहे कोई भी मौसम हो इनके सामने से चप्पल हाथ में लेकर निकलना पड़ता है. पर भाइयों अब ये नया भारत है हमारा. इसमें हमारे लक्ष्य भी नए हैं. अब तो कम से कम इस थोपी हुई अर्थहीन कुप्रथा से मुक्ति तो होनी ही चाहिए – रश्मि रस्तोगी, लखनऊ

Location :
Posted Date : September 16, 2017

ये तो हद है

देखिये क्या हो रहा है हमारे बाड़मेर में।  यहाँ के केंद्रीय विद्यालय में फिर एक मासूम के साथ दुष्कर्म की घटना सामने आई है। बाड़मेर के जालीपा केंद्रीय विद्यालय में पढ़ने वाली एक मासूम के साथ गुरूवार को यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया हैं। ये तो हद है।  सबसे निक्कमे पुलिस अधीक्षक साबित हो रहे है डॉ. गगनदीप सिंगला बाड़मेर पुलिस के इतिहास में ।  इनके कार्यकाल में जितनी खाकी दागदार हुई है, सायद कभी नही हुई है। दुष्कर्म पीड़िता द्वारा आत्महत्या, क्रूड ऑइल चोरी में पुलिस के आला अधिकारी की संलिप्तता, थानाधिकारी द्वारा फरियादी से अस्मत मांगना, उप निरीक्षक द्वारा कार्रवाई की ऐवज में रिश्वत मांगना व मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म होने के 24 घंटे बाद मुकदमा दर्ज करना। बाड़मेर पुलिस ने पिछले एक सप्ताह में ऐसे कई कारनामों को अंजाम दिया, जिसने आमजन में पुलिस के विश्वास को तोड़ दिया है।

अभी हाल में एक दुष्कर्म पीड़िता इन्ही पुलिस अधीक्षक से दो बार मिल कर बलात्कारियों को गिरफ्तार करने की गुजारिस कर चुकी थी। पुलिस जाँच में दुष्कर्म होने की पुष्टि भी हो चुकी थी, लेकिन पुलिस अधिकारी बलात्कारियों को बचाने में लगे रहे। पीड़िता न्याय की फरियाद करती रही, बलात्कारी पीड़िता के परिवार को धमकाते रहे और पुलिस अधीक्षक धृतराष्ट् बने रहे।बलात्कारियो की धमकियों व पुलिस की अनदेखी के कारण पीड़िता ने आत्महत्या कर ली। पीड़िता की बलि लेने के बाद पुलिस ने 24 घंटे में ही दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। काश यह सब पहले कर लिया होता तो पीड़िता को जान नही देनी पड़ती। – भोमाराम जाट, बाड़मेर (Sep/16/2017)

Location :
Posted Date :

दुःख से भी ज्यादा शर्म की बात है ये

2 बच्चियों को होमवर्क न करने की मिली सज़ा, टीचर ने पूरी क्लास के सामने खुलवाये शर्ट के बटन..होमवर्क यानि गृहकार्य न करने पर क्या सज़ा मिलती है. क्लास के बाहर जाना, छड़ी या डस्टर से मार या फिर बेंच पर खड़ा कर देना. लेकिन सी.के. प्रजापति स्कूल की एक शिक्षका को इतना गुस्सा आ गया कि उन्होंने दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली दो बच्चियों की शर्ट के बटन ही खुलवा दिये. ये वड़ोदरा की घटना है. जानकारी के मुताबिक वडोदरा स्थित इस स्कूल की एक शिक्षिका ने पूरे क्लास के सामने दो बच्चियों को ये घिनौनी सज़ा दी. ये घटना तब बाहर आई जब दोनों बच्चियों के माता-पिता ने स्कूल जाकर शिक्षिका की शिकायत की.कितने दुःख की बात है ये..उससे भी ज्यादा शर्म की बात है ये कि इस शिक्षक समुदाय को हो क्या गया है? पूरे देश में लगातार शिक्षकों के इस तरह के अपराध सामने आ रहे हैं. शिक्षा देने जैसा पावन कार्य करने वाले इन शिक्षकों को हो क्या गया है कि मासूम बच्चों के साथ इतने घिनौने दुर्व्यवहार ? अगर देश की सरकार नहीं चेती तो आने वाले दिनों में लोग अपने बच्चों को स्कूल भेजने में डरेंगे. ऐसा एक या दो दिन नहीं हो रहा, अब तो ऐसा रोज़ हो रहा है. किस बात की कुंठा निकाल रहे हैं इस प्रकार के घटिया शिक्षक बच्चों के ऊपर ? – डॉ. इंदिरा राय, लखनऊ (Sep/16/2017)

Location :
Posted Date :

पांवटासाहिब में अतिक्रमण का बाज़ार

हमारे यहां पांवटासाहिब में अतिक्रमण का बाज़ार लगा हुआ है. आईपीएच विभाग ने अतिक्रमणकारियों को कई दफा वार्निंग दी है पर कोई नहीं सुन रहा.  मंगलवार को गिरि-पुरूवाला सिंचाई नहर योजना में तैनात आईपीएच के जेई सुभाष शर्मा ने मौके पर पहुंचकर पहले तो अतिक्रमण करने वाले व्यक्ति को खुद अतिक्रमण हटाने को कहा मगर उसने अतिक्रमण नहीं हटाया. यहां एक पूर्व नायब तहसीलदार साहब ने नहर पर रातोंरात दीवार देकर करीब 15 फीट सड़क पर कब्जा कर लिया है.  शुभखेड़ा चौक पर शाॅपिंग कॉम्प्लेक्स बना रहे एक पूर्व अधिकारी ने अतिक्रमण किया हुआ है. उनको यह पता होते हुए भी कि जमीन आईपीएच विभाग की है, उन्होंने अतिक्रमण किया। नहर के आसपास की जमीन के रेट 5 लाख बिस्वा तक पहुंच जाने के कारण लोगों ने विभाग की नहर को कब्जाना शुरू कर दिया है. अपना मकान बनाते-बनाते लोग कुछ मीटर से कई मीटर तक जमीन पर कब्जा कर देते हैं. प्रशासन अगर ऐसे ही सोता रहा तो उसकी अपनी ज़मीनें और बिल्डिंगें भी अतिक्रमणकारियों  के हाथ आ जाएंगी. – अंजुमन फारुखी, पांवटा साहिब

Location :
Posted Date : September 15, 2017

नीमच बना देह व्यापार की मंडी

हमारे नीमच शहर में शर्मनाक हालत है. सारा शहर देह व्यापार की मंडी बना हुआ है. हालांकि पुलिस छोटी मोटी कार्रवाई करती रहती है पर सब जानते हैं कि ये अवैध मंडी पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत के बिना इस तरह फलफूल नहीं सकती. मैं भोपाल में बैठे प्रदेश के बड़े नेताओं से गुजारिश करूँगा कि यहां आ कर इस गंदगी की जांच कराएं और नीमच को इससे मुक्ति दिलायें जिससे शहर के सभ्रांत लोगों पर इस कालिख के दाग न लग सकें. – अनुराग बासु, नीमच  (Sep/15/2017)

Location :
Posted Date :

मध्यप्रदेश में विकराल होता स्वाइन फ्लू का प्रकोप

मध्यप्रदेश सरकार से अपेक्षा है कि प्रदेश में तेज़ी से फैलती इस स्वाइन फ्लू नामक महामारी से निपटने के लिए कड़े कदम उठायें.  मध्यप्रदेश में इस साल 1 जुलाई से लेकर अब तक स्वाइन फ्लू से 44 लोगों की मौतें हो चुकी हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय इस तरह मौन साध कर बैठा हुआ है जैसे कि कुछ भी न हुआ हो. लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री शिवराज जी से भी मेरा निवेदन है कि कृपा कर मंत्रालय का ध्यान इस तरफ आकृष्ट कराएं ताकि स्वाइन फ्लू को प्रदेश में गंभीरता से लिया जा सके..और ये विपदा समय रहते समाप्त की जा सके. – नीमा त्रिपाठी, इंदौर (Sep/15/2017)

Location :
Posted Date :

pathetic situation of Gorakhpur hospitals

Here in Gorakhpur we need to launch a real very vigorous campaign to highlight the “bad shape” of medical care at government hospitals. We are left vulnerable in these hospitals just  days after scores of children died at hospitals in Gorakhpur and Farrukhabad. We have to make all efforts possible to find out the “reality” of the medical facilities and to make arrangements in order to provide as much help as possible to patients..that to on a war-footing immediately and ASAP !! – Neelam Pandey, Lucknow

 

Location :
Posted Date : September 14, 2017

रायपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की भारी कमी, सौ छात्रों पर एक शिक्षक

मैं यहां रायपुर में शिक्षकों की सुविधा पर पोस्टिंग की तरफ प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराना चाहूंगी. एक तो शिक्षकों की यहां भारी कमी है ऊपर से शिक्षकों को उनकी पसंद की जगहों पर नियुक्तियां मिल रही हैं.  किसी ने अपने गांव में तो किसी ने घर के पास पोस्टिंग करा ली है.  यहां के प्राइमरी स्कूल डोंगीतराई में कुल 125 बच्चे हैं. यहां 6 शिक्षक कार्यरत हैं. 2 शिक्षक अतिरिक्त हैं. इसी तरह प्राइमरी स्कूल डूंडा में 128 बच्चों के लिए 10 शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि मापदंड के हिसाब से 5 शिक्षक होने चाहिए. 6 शिक्षक अतिरिक्त हैं. वहीं सरकारी प्राइमरी स्कूल जरवाय, रायपुर में पहली से लेकर पांचवीं तक स्कूल संचालित हो रहा है.  लेकिन यहां पढ़ाने वाले सिर्फ एक ही शिक्षक की नियुक्ति हो सकी है. अकेला शिक्षक 120 छात्रों को चार-चार अलग-अलग विषयों और पांच कक्षाओं को पढ़ा रहा है.यहीं नहीं प्राइमरी स्कूल कबीर नगर में 160 छात्रों के लिए एक शिक्षक, प्राइमरी स्कूल नालापारा सुनीता पार्क में 106 छात्रों के लिए 02 शिक्षक हैं, जबकि 60 छात्रों पर ही दो शिक्षक चाहिए.  इसी तरह नवीन गुरु घासीदास गुढ़ियारी स्कूल में 151 के लिए 02 शिक्षक पढ़ा रहे हैं. शिक्षा विभाग से निवेदन है कि कृपा कर इस दिशा में कुछ करें. ग्रामीण बच्चों के भविष्य का सवाल है. – रजनी सदानंद शिंदे, बेमेतरा, छत्तीसगढ़

Location :
Posted Date :

बच्चों के साथ बढ़ रही हिंसा के विरोध में एकजुट होइए !!

कुछ महीने पहले नोएडा के स्कूल से मेरे मित्र मितिन राज सिंह की बेटी गायब होते होते बची। एडमिशन से लेकर फीस और तमाम तामझाम के नाम पर हर अभिवावक प्रताड़ित होता रहा है। बावजूद उन सबके बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल मैनेजमेंट कोई जिम्मदारी नहीं लेता.आज शाम जंतर-मन्तर पर, अपनी भावी पीढ़ी को एक सुरक्षित माहौल, एक सुरक्षित स्कूल देने के लिए और बच्चों के साथ बढ़ रही हिंसा के लिए दोषी प्रशासन, स्कूल मैनेजमेंट के विरोध में एकजुट होइए।- सुशील कृष्णेत, नोएडा (Sep/14/2017)

Location :
Posted Date :

केजरीवाल जी, जवाब दीजिये

ये भी एक डर्टी पिक्चर है देश की. हम यहां राजधानी में रह रहे हैं, यहां ये हाल है तो बाकी जगहों का क्या कह सकते हैं. बुरी हालत है रैनबसेरों की. आप कभी जा कर देखिये. जितने लोगों के लिए उसमे जगह है उससे ज्यादा लोगों को ठूंसा गया है. बिछाने ओढ़ने के लिए बिस्तर नहीं है. सीलन है चारों तरफ. मच्छरों का तो कहना ही क्या. भीषण दुर्दशा है. क्या आप अपने घर में ऐसे ही सोते हैं? क्या अपने घर के मेहमानों को आप ऐसे ही सुलाते हैं? रेन बसेरों का ये ढोंग क्यों? जब नहीं कर सकते आप तो साफ़ कहिये. पहले ही जीवन से दुखी लोगों को और टार्चर मत कीजिये केजरीवाल जी? कहाँ गया पैसा आपका? सारी दिल्ली में बड़े बड़े बोर्ड लगाने के लिए हज़ारों करोड़ रुपये हैं आपके पास लेकिन इन बेघर बेदर लोगों के लिए कुछ नहीं, आखिर इस भ्रष्टाचारपूर्ण अन्याय का कारण क्या है? – इंद्रनील त्रिपाठी, इंदिरापुरम (Sep/13/2017)

Location :
Posted Date : September 13, 2017
Total Views: 50653